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मैं कम बोलता हूं, पर कुछ लोग कहते हैं कि जब मैं बोलता हूं तो बहुत बोलता हूं. मुझे लगता है कि मैं ज्यादा सोचता हूं मगर उनसे पूछ कर देखिये जिन्हे मैंने बिन सोचे समझे जाने क्या क्या कहा है! मैं जैसा खुद को देखता हूं, शायद मैं वैसा नहीं हूं....... कभी कभी थोड़ा सा चालाक और कभी बहुत भोला भी... कभी थोड़ा क्रूर और कभी थोड़ा भावुक भी.... मैं एक बहुत आम इन्सान हूं जिसके कुछ सपने हैं...कुछ टूटे हैं और बहुत से पूरे भी हुए हैं...पर मैं भी एक आम आदमी की तरह् अपनी ज़िन्दगी से सन्तुष्ट नही हूं... मुझे लगता है कि मैं नास्तिक भी हूं थोड़ा सा...थोड़ा सा विद्रोही...परम्परायें तोड़ना चाहता हूं ...और कभी कभी थोड़ा डरता भी हूं... मुझे खुद से बातें करना पसंद है और दीवारों से भी... बहुत से और लोगों की तरह मुझे भी लगता है कि मैं बहुत अकेला हूं... मैं बहुत मजबूत हूं और बहुत कमजोर भी... लोग कहते हैं लड़कों को नहीं रोना चाहिये...पर मैं रोता भी हूं...और मुझे इस पर गर्व है क्योंकि मैं कुछ ज्यादा महसूस करता हूं!आप मुझे nksheoran@gmail.com पर ईमेल से सन्देश भेज सकते हैं.+919812335234,+919812794323

Monday, February 13, 2012

प्रेमिका को सिस्टर बता गए: हास्य कविता

अब क्या बताए जब से हमारे एक दोस्त नेता हुए हैं एक नंबर के झुठे हो गए है. एक समय था जब भाई शर्मा जो आजकल लोकल एमएलए की चापलूसी करके अपनी पार्टी का नया प्रत्याशी बना है वह कभी स्कूल में हरीशचंद का रोल करता था नाटक में. लेकिन आज तो उसने झुठ बोलने में मिसेज कौशिश की लवली बहू का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है.


अभी कल ही की बात है जनाब हमारे साथ घूम रहे थे कि इतने मॆं एक मोहतरमा आई और उन्हें नमस्ते करके चली गई. पूछने पर बोले मुहंबोली बहन है. लेकिन हम तो जानते थे भैया मैटर कुछ और है. अब उनकी इस स्थिति पर हमें प्रसिद्ध कवि हास्य कवि काका हाथरसी की एक कविता याद आई है जिसे मैं यहां दे रहा हूं.



हास्य कवि हाथरसी की प्रेमिका को सिस्टर बता गए:



सीधी नजर हुयी तो सीट पर बिठा गए।
टेढी हुयी तो कान पकड कर उठा गये।



सुन कर रिजल्ट गिर पडे दौरा पडा दिल का।
डाक्टर इलेक्शन का रियेक्शन बता गये ।



अन्दर से हंस रहे है विरोधी की मौत पर।
ऊपर से ग्लीसरीन के आंसू बहा गये ।



भूंखो के पेट देखकर नेताजी रो पडे ।
पार्टी में बीस खस्ता कचौडी उडा गये ।



जब देखा अपने दल में कोई दम नही रहा ।
मारी छलांग खाई से “आई“ में आ गये ।



करते रहो आलोचना देते रहो गाली
मंत्री की कुर्सी मिल गई गंगा नहा गए ।



काका ने पूछा ‘साहब ये लेडी कौन है’
थी प्रेमिका मगर उसे सिस्टर बता गए।।

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